इंदीवर

इंदीवर एक ऐसे गीतकार जिन्होंने बेहद उम्दा गीत लिखे, ऐसे कठिन हिंदी वाले गीत भी जिन्हें गाने में गायकों को मुश्किल होती थी। पर जब समय बदला तो उन्होंने “बूम बूम” और “आप जैसा कोई मेरी ज़िन्दगी में आए” जैसे गीत भी लिखे।

उत्तर प्रदेश के झाँसी ज़िले के बरुआ सागर में 1 जनवरी 1924 को श्यामलाल बाबू राय का जन्म हुआ। जिन्होंने आज़ादी के संघर्ष के दौरान श्यामलाल बाबू “आज़ाद ” के नाम से देशभक्ति गीत लिखे। वो जब फ़िल्मों में गीत लिखने लगे तो कहलाए “इंदीवर” और इसी नाम से दुनिया ने उन्हें पहचाना। इंदीवर का मतलब होता है “नील कमल ” जो कि एक रेयर फूल है और सुन्दर आँखों के लिए जिसकी उपमा दी जाती है। मगर उनका जीवन उतना सुन्दर गुज़रा नहीं था। बचपन में ही उनके माता पिता का देहांत हो गया था, तब उनकी बड़ी बहन और जीजाजी उन्हें अपने साथ ले गए, लेकिन वहाँ उनका मन नहीं लगा और वो वापस लौट आए।

इंदीवर

इंदीवर ज़बरदस्ती की शादी से भाग कर बम्बई पहुँच गए थे

बचपन के उस दौर में उनके संवेदनशील मन को गीत लिखने में आराम मिला तो वही धीरे-धीरे शौक़ में बदल गया। कहते हैं कि ये शौक़ एक फ़क़ीर बाबा के संपर्क में आने से और ज़्यादा बढ़ा। शायद वही वक़्त रहा होगा जब उनके बहन और बहनोई ने उनकी शादी के बारे में सोचना शुरु कर दिया। परिवार वाले ऐसे हालात में अक्सर डर जाते हैं कि कहीं उनका लड़का सन्यासी न बन जाए, शादी हो जाएगी तो परिवार की ज़िम्मेदारी में बँध जाएगा। मगर श्यामलाल बाबू अपनी शादी के सख़्त ख़िलाफ़ थे पर एक 18-19 साल के लड़के की उस समय किसी ने नहीं सुनी और उनकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ उनकी शादी करा दी ताकि वो अपने जीवन को व्यवस्थित कर लें और घर में कोई उनकी देखभाल करने वाला भी आ जाए।

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मगर जबरन हुई उस शादी का कोई पॉजिटिव असर नहीं हुआ और कुछ वक़्त के बाद श्यामलाल बाबू घर-पत्नी परिवार से भागकर मुंबई आ गए। उस समय उनकी उम्र कोई बीस साल रही होगी, स्टूडियो स्टूडियो चक्कर काटते रहे पर हार नहीं मानी और क़रीब दो साल के कड़े संघर्ष के बाद उन्हें मिली फ़िल्म “डबल फेस’ जिस में उन्होंने पहली बार गीत लिखे मगर फ़िल्म चली नहीं न ही गीतों को मक़बूलियत हासिल हुई। ये उनके लिए एक झटका तो था मगर फिर भी वो मुंबई में ठीके रहे और जो भी काम मिला, B/C ग्रेड की जैसी भी फिल्में मिलीं उन्होंने कीं पर साथ ही घर की अहमियत का एहसास भी हुआ। और फिर वो अपने गाँव अपने घर लौट आए, कहते हैं कि उनकी वापसी पर उनकी पत्नी ने बेहद ख़ुशी ज़ाहिर की और फिर धीरे-धीरे दोनों के बीच की कसक काम हुई और दूरियाँ भी घटने लगीं।

इंदीवर

क़रीब एक दशक लम्बे संघर्ष के बाद खुला क़िस्मत का दरवाज़ा

इंदीवर घर तो लौट आए थे मगर गीतकार बनने का सपना अधूरा था और उसका दर्द गाहे-बगाहे छलक ही जाता था। इस बार उनकी पत्नी ने ख़ुद उन्हें बम्बई जाकर भाग्य आज़माने को कहा और वो एक बार फिर से मुंबई रवाना हुए फ़िल्मों में बतौर गीतकार अपना करियर बनाने के लिए और इस बार क़िस्मत को उन पर रहम आ गया। उन्हें फ़िल्म “मल्हार” के रूप में एक बड़ा ब्रेक मिला। 1951 मे आई “मल्हार” का ये गीत “बड़े अरमानों से रखा है बलम तेरी क़सम प्यार की दुनिया में ये पहला क़दम” ने इंदीवर को काफ़ी प्रशंसा दिलाई। इसमें एक ताज़गी थी जो लोगों को बहुत पसंद आई। पर फिर भी सफलता इंदीवर से दूर थी, और वो पहचान बनाने के लिए उन्हें बहुत लम्बा इंतज़ार करना पड़ा।

इंदीवर

इंदीवर के हिस्से में सफलता आई क़रीब एक दशक लंबे इंतज़ार के बाद। जब 1963 में बाबूभाई मिस्त्री की म्यूजिकल हिट पारसमणि रिलीज़ हुई। संगीतकार लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल की ये पहली फिल्म थी, जिस के सभी गाने रातों रात मशहूर हो गए। इसके बाद इंदीवर को कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा। मगर इंदीवर का निजी जीवन सुखमय नहीं रहा। कहते हैं कि कामयाबी पाने के बाद जब उन्होंने अपनी पत्नी को मुंबई लाना चाहा तो उन्होंने साथ जाने से इंकार कर दिया। शायद मुंबई जैसी नई जगह और बड़े शहर को लेकर उनके मन में कोई डर रहा हो, या किसी तरह की कोई ज़िद! फिर श्यामलाल बाबू यानी इंदीवर भी ज़िद पर अड़ गए और उस ज़िद की वजह से पति-पत्नी के रिश्ते में फिर से दूरियाँ आ गईं जो कहते हैं कभी ख़त्म नहीं हुईं। पर रिश्तों की उस उलझन और टूटन का दर्द अक्सर उनके गीतों में छलकता रहा।

इंदीवर ने 60 के दशक से 90 के दशक तक लगभग हर संगीतकार के साथ काम किया

कुछ संगीतकारों और फ़िल्मकारों के साथ इंदीवर की अटूट जोड़ी बनी जिसने बहुत से हिट गीत दिए। अगर S D बर्मन को छोड़ दें तो उन्होंने रोशन, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल से लेकर विजु शाह, आदेश श्रीवास्तव, आनंद राज आनंद, और 90 के दशक में जतिन ललित तक ज़्यादातर सभी संगीतकारों के लिए गीत लिखे पर उनका सबसे अच्छा और लम्बा एसोसिएशन रहा बप्पी लहरी, राजेश रोशन, कल्याणजी-आनंद जी के साथ। कल्याणजी-आनंद जी के लिए इंदीवर ने सरस्वतीचंद्र, जॉनी मेरा नाम, सच्चा-झूठा, क़ुर्बानी, धर्मात्मा जैसी कई सुपर हिट फिल्मों के यादगार गीत लिखे।

इंदीवर

सरस्वतीचंद्र एक क्लासिक उपन्यास पर आधारित है और इसमें ऐसे गीतों की ज़रूरत थी जो हिंदी में हों और जिनमें कविता का पुट आये इसीलिए इंदीवर को चुना गया। किसी भी कवि, लेखक या गीतकार के लिए इससे बड़ा सम्मान और क्या होगा कि उसका लिखा पढ़-सुनकर लोग ज़िंदगी की तरफ़ लौट आएं, और ये सम्मान मिला इंदीवर को। फ़िल्म “सरस्वतीचंद्र” का एक गाना है “छोड़ दे सारी दुनिया किसी के लिए ये मुनासिब नहीं आदमी के लिए” कहते हैं इस गाने को सुनकर बहुत से लोगों ने आत्महत्या का विचार त्याग दिया था।

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फिल्मकारों में राकेश रोशन, फ़िरोज़ ख़ान, मनोज कुमार की फिल्मों के लिए उन्होंने बेहतरीन गीत लिखे। मनोज कुमार के साथ शरुआत हुई फ़िल्म उपकार से और फिर पूरब और पश्चिम, यादगार, पहचान जैसी कई फिल्मों में इंदीवर ने देश प्रेम से भरपूर और भावनात्मक गीत लिखे। “कसमें वादे प्यार वफ़ा सब बातें हैं बातों का क्या’, “भारत का रहने वाला हूँ भारत की बात सुनाता हूँ”, “जिस पथ पे चला उस पथ पे मुझे आँचल तो बिछाने दे”, “आया न हमको प्यार जताना” जैसे कई अर्थपूर्ण, यादगार गीत उन्होंने लिखे। “पूरब और पश्चिम” का ये गीत ‘कोई जब तुम्हारा ह्रदय’ शुद्ध हिंदी में लिखे गीतों का एक बेहतरीन नमूना है जो बहुत लोकप्रिय भी है। जब ये गाना रिकॉर्ड हुआ तो काफ़ी Takes हुए और गायक मुकेश को ये शक़ था कि ये गाना चलेगा भी या नहीं। पर ये सिर्फ़ चला ही नहीं बल्कि टूटे दिलों की आवाज़ बन गया।

इंदीवर
उन के लिखे गीतों में एक तरह का विरोधाभास नज़र आता है। एक तरफ़ जहाँ उन्होंने भावनात्मक, ख़ूबसूरत, रोमेंटिक गीत लिखे, ज़िंदगी की सच्चाई बताते दार्शनिक गीत लिखे, देशभक्ति गीत लिखे वहीं दूसरी तरफ़ उनके लिखे ऐसे गीत भी मिलते हैं जो उस कसौटी पर पूरे नहीं उतरते। उनके ऐसे गीत 80 के दशक में सुनाई देने लगे थे जब डिस्को लहर उठी, पर इंदीवर ने उसमें भी खुद को फिट कर लिया। कह सकते हैं कि यही फ़िल्मी गीतकारों की काबिलियत है और यही शायद मजबूरी भी कि उन्हें फ़िल्म की सिचुएशन और बदलते वक़्त के अनुसार चलना पड़ता है और जो नहीं चलता वो गुमनामी के अंधेरों में खोकर ख़त्म हो जाता है।

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इंदीवर

इंदीवर के लोकप्रिय गीतों की बहार 80-90 के दशक तक जारी रही। उस दौरान बहुत से गीत लोकप्रिय हुए, हिट हुए। नाज़िया हसन के गाए “आप जैसा कोई” और “बूम बूम” जैसे गाने भी उन्होंने ही लिखे हैं। वो बदलते वक़्त की धार में बहते रहे पर उस दौर के उनके गीतों में कवि इंदीवर की काव्यात्मकता कहीं-कहीं ही नज़र आती है। “तोहफ़ा”, “ख़ुदग़र्ज़”, “खून भरी मांग”, “दरियादिल”, “घायल”, “करण-अर्जुन”, “क्रिमिनल”, “कोयला”, “ग़ुलाम”, “सरफ़रोश”  जैसी बहुत सी फिल्मों के लोकप्रिय गीत उनकी क़लम से निकले और लोगों की ज़बान पर चढ़े। इन्हीं के बीच प्रेमगीत कामचोर आख़िर क्यों जैसी फ़िल्मों के गीत भी सुनने को मिले जो बेहद स्तरीय रहे।

इंदीवर को ‘क्या’ शब्द से ख़ास मोह था

हर लेखक और गीतकार के कुछ पसंदीदा शब्द होते हैं जो जाने अनजाने उनकी रचना का हिस्सा बन जाते हैं। इंदीवर का पसंदीदा शब्द था – “क्या” जिसे उन्होंने अलग अलग वैरिएशंस में अपने गीतों में उतारा। पेश हैं कुछ उदाहरण –

  • कसमें वादे प्यार वफ़ा सब बातें हैं बातों का क्या
  • एक तू न मिला सारी दुनिया मिले भी तो क्या है
  • क्या देखते हो सूरत तुम्हारी
  • क्या ख़ूब लगती हो बड़ी सुन्दर दिखती हो
  • तू मिले दिल खिले और जीने को क्या चाहिए

इंदीवर

कहते हैं कि इंदीवर गीत लिखने के लिए काफी वक़्त लिया करते थे ऐसे में उनसे ट्रिक से जल्दी काम करवाना पड़ता था। ऐसा ही हुआ जब सफ़र के लिए गीत लिखने की बात आई, गीत थोड़े जल्दी चाहिए थे, तो कल्याणजी आनंदजी ने उन्हें सुंनने के लिए ही उनके सामने ही किसी और गीतकार से गीत लिखवाने की बात कही। ये सुनना था कि इंदीवर ने सिर्फ़ आधे घंटे में सफ़र का टाइटल सांग तैयार कर दिया। इंदीवर को हिंदी में लिखना  बेहद पसंद था पर अपनी शायरी को और समृद्ध करने के लिए उन्होंने उर्दू अरबी फ़ारसी भाषाएं भी पढ़ीं और अपने गीतों में गाहे-बगाहे उनका इस्तेमाल भी किया। 40 साल के फ़िल्मी सफ़र में इंदीवर ने क़रीब 300 फ़िल्मों में एक हज़ार से ज़्यादा गाने लिखे। उन्हें फिल्म अमानुष के गीत “दिल ऐसा किसी ने मेरा तोडा” के लिए फ़िल्मफ़ेयर का बेस्ट लिरिसिस्ट अवार्ड दिया गया।

27 फरवरी 1997 को उन्होंने आखिरी सांस ली,  लेकिन उनके लिखे अनमोल गीत हमेशा उन्हें अमर रखेंगे।

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इंदीवर के चुनिंदा गीतों की सूची –

  • बड़े अरमानों से रखा है – मल्हार
  • रोशन तुम्हीं से दुनिया – पारसमणि
  • पास बैठो तबियत – पुनर्मिलन
  • हमने तुझको प्यार किया है -दूल्हा दुल्हन
  • जिस दिल में बसा था प्यार – सहेली
  • वक़्त करता जो वफ़ा – दिल ने पुकारा
  • हर खुशी हो वहाँ – उपकार
  • फूल तुम्हें भेजा है ख़त में – सरस्वती चंद्र
  • चंदन सा बदन – सरस्वती चंद्र
  • महलों का राजा मिला – अनोखी रात
  • ताल मिले नदी के जल में – अनोखी रात
  • दर्पण को देखा तू ने – उपासना
  • यूँ ही तुम मुझसे बात करती हो – सच्चा झूठा
  • जिंदगी का सफर – सफर
  • जीवन से भरी तेरी आँखें – सफ़र
  • ओ रे कन्हैया – छोटी बहू
  • रूप तेरा ऐसा दर्पण में ना – एक बार मुस्कुरा दो
  • समझौता ग़मों से कर लो – समझौता
  • दिल ऐसा किसी ने मेरा तोड़ा – अमानुष
  • मधुबन खुशबू देता है – साजन बिना सुहागन
  • हम तुम्हें चाहते हैं ऐसे – कुर्बानी
  • होठों से छू लो तुम – प्रेम गीत
  • दुश्मन ना करे दोस्त ने – आख़िर क्यों
  • नीले नीले अम्बर पर – कलाकार
  • तुम से बढ़कर दुनिया में – कामचोर
  • तुम मिले दिल खिले – क्रिमिनल
  • जब कोई बात बिगाड़ जाए – जुर्म
  • ये बंधन तो प्यार का बंधन है – करण अर्जुन
  • ना कजरे की धार – मोहरा