C अर्जुन

C अर्जुन लो बजट फ़िल्मों के कामयाब संगीतकार जिन्होंने कितने ही बेहतरीन गीतों का संगीत दिया।

C अर्जुन हिट गीतों के अंजान संगीतकार

पुनर्मिलन फ़िल्म की ग़ज़ल “पास बैठो तबीयत बहल जाएगी” शायद हर किसी ने सुनी होगी ! स्क्रीन पर हास्य कलाकार जगदीप पर फ़िल्माई गई इस ग़ज़ल का म्यूजिक संगीतकार C अर्जुन ने ही दिया है। उन्हें बहुत ज़्यादा फिल्मों में संगीत देने का मौक़ा नहीं मिला और मेनस्ट्रीम सिनेमा में तो बिलकुल नहीं। उन्होंने हमेशा लो बजट फिल्मों के लिए ही म्यूज़िक दिया लेकिन उसका स्तर हमेशा ऊंचा रहा ये अलग बात है कि उन्हें उतनी शोहरत नहीं मिली।

C अर्जुन

लेकिन कुछ फिल्में ऐसी हैं जिनके गाने आज भी पसंद किये जाते हैं और एक फ़िल्म के म्यूज़िक ने तो उस साल रिकॉर्ड तोड़ा था जिस साल शोले रिलीज़ हुई थी। उसके बारे में बात करने से पहले C अर्जुन से जुडी कुछ और बातें जान लेते हैं।

C अर्जुन का फ़िल्मी सफ़र हमेशा संघर्षों भरा ही रहा

C अर्जुन एक सिंधी परिवार से ताल्लुक़ रखते थे, उनका पूरा नाम था अर्जुन परमानन्द चंदनानी। उनका परिवार देश के बँटवारे के बाद बड़ौदा आया था। C अर्जुन के पिता एक गायक थे, C अर्जुन ने उन्हीं से संगीत की बारीक़ियाँ सीखीं। जब फ़िल्मों में आए तो वो एक और सिंधी म्यूज़िक डायरेक्टर “बुलो सी रानी” के सहायक बने।

C अर्जुन

जब सिंधी की पहली फ़िल्म “अबाना” बनी तो उसमें संगीत C अर्जुन ने ही दिया था। बतौर इंडिपेंडेंट म्यूज़िक डायरेक्टर ये उनकी पहली फिल्म थी जो कि ब्लॉकबस्टर साबित हुई। उस हिसाब से उनके पास फ़िल्मों की लाइन लग जानी चाहिए थी मगर ऐसा नहीं हुआ। जबकि उसी फ़िल्म से अभिनेत्री साधना ने अपना फ़िल्मी सफ़र शुरू किया था और हम सब जानते हैं कि अबाना के बाद ही उन्हें “लव इन शिमला” और “परख” जैसी फिल्में मिलीं।

कृपया इन्हें भी पढ़ें – महिला दिवस पर एक नज़र – भारतीय सिनेमा की कुछ अग्रणी महिलाओं पर

C अर्जुन के संगीत से सजी पहली हिंदी आई 1960 में “रोड नंबर 303”, ये किसी बड़े बैनर की फिल्म नहीं थी इसलिए अच्छे म्यूजिक और अच्छी शायरी के बावजूद बहुत मशहूर नहीं हुआ। कहते हैं इसमें उन्होंने ओ पी नैयर स्टाइल का म्यूजिक दिया था। इसके अगले साल आई “मैं और मेरा भाई” इसके कुछेक गाने बहुत अच्छे थे। मगर जब पुनर्मिलन आई तो इसमें उनकी कंपोज़ की गई मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ में रिकॉर्ड की गई ग़ज़ल “पास बैठो तबीयत बहाल जाएगी मौत भी आ रही हो तो टल जाएगी” बहुत मशहूर हुई। इसके अलावा भी इस फ़िल्म के गाने पसंद किये गए।

इस दौर में C अर्जुन ने बहुत ख़ूबसूरत ग़ज़लें कंपोज़ कीं। 1965 में आई सुशीला इसकी बेहतरीन  मिसाल है – “ग़म की अँधेरी रात में दिल को न बेक़रार कर”, और मुबारक बेगम की आवाज़ में “बेमुरव्वत बेवफ़ा बेगाना-ए-दिल आप हैं” जैसे गीत बहुत लोकप्रिय हुए। मगर इसके बाद भी मेनस्ट्रीम सिनेमा में C अर्जुन का दख़ल नहीं हो सका।

ब्लॉक बस्टर फ़िल्म देने के बावजूद C अर्जुन को इंडस्ट्री से उपेक्षा ही मिली

C अर्जुन को हमेशा बी ग्रैड, सी ग्रेड, कम बजट वाली फिल्में ही मिलीं। ऐसी ही कम बजट की फिल्म थी “जय संतोषी माँ” जो उनके करियर की सबसे कामयाब फ़िल्म थी। इसके गाने हफ़्तों तक रेडियो पर किसी न किसी पायदान पर बजते ही रहते थे। इस फिल्म का सीधा मुक़ाबला था मल्टीस्टारर “शोले” से। और किसी को नहीं लगा था कि ये फ़िल्म कहीं टिकेगी, मगर रिलीज़ के दो दिन बाद जिस तरह फिल्म ने रफ़्तार पकड़ी वो ऐतिहासिक था। फ़िल्म के गानों में जो भक्ति रस और लोक संगीत का मिश्रण था उसने सालों तक लोगों को मोहित रखा।

C अर्जुन

जय संतोषी माँ के संगीत से C अर्जुन को लोगों के बीच तो लोकप्रियता मिली और बहुत से ऑफर्स भी आए मगर बड़े बैनर फिर भी उनसे दूर ही रहे। उल्टा एक नुक्सान ये हुआ कि उन्हें धार्मिक-पौराणिक फ़िल्मों में संगीत देने के ऑफर मिलने लगे। थक हार कर उन्होंने ऐसी फिल्में की भीं, मगर “जय संतोषी माँ” वाली कामयाबी फिर किसी फ़िल्म से नहीं मिली। हाँ, “नवाब साहब” जैसी फ़िल्मों के कुछेक गाने ज़रुर मशहूर हुए। इस फ़िल्म का ये गाना आपने भी सुना होगा “अब से पहले तो ये दिल की हालत न थी, आज क्या हो गया।

C अर्जुन सब कुछ भुलाकर अंत तक काम करते रहे

C अर्जुन एक नॉन-फ़िल्मी गीत की रिकॉर्डिंग कर रहे थे जब अचानक उन्हें दिल का दौरा पड़ा और वहीं 30 अप्रैल 1992 को उन्होंने अंतिम सांस ली। अपने तीन दशक लम्बे करियर में C  अर्जुन ने हिंदी के अलावा सिंधी, गुजराती और हरियाणवी फ़िल्मों में भी संगीत दिया। कई नॉन फ़िल्मी एलबम्स रिकॉर्ड कीं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि जाँनिसार अख़्तर की शायरी को उम्दा धुनों में पिरोने का काम जितना बेहतरीन C अर्जुन ने किया उतना कोई और नहीं कर पाया।

कृपया इन्हें भी पढ़ें – मुबारक बेगम – कभी तन्हाइयों में यूँ हमारी याद आएगी

मगर विडम्बना यही रही कि वो अपने दायरों को तोड़ नहीं सके और न ही किसी ने उन्हें ये मौक़ा दिया कि वो अपनी प्रतिभा को बेहतर तरीके से दुनिया के सामने रख पाते। मगर उनका संगीत ख़ासतौर पर फ़िल्म “जय संतोषी माँ” के गीत और उनके संगीत से सजी ग़ज़लें हमेशा C अर्जुन के नाम को ज़िंदा रखेंगे।